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अभिलेखीकरण की योजनायें
  कार्य कलाप
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अभिलेख प्रबन्ध
वर्ष २००५-०६ में संरक्षित अभिलेखों की ११९१९ पत्रावलियों, ३३९१ वाल्यूम्स, पाण्डुलिपियों के १६७७२ प्रपत्रो,ं ५९३ गजट एवं ६५० व्यक्तिगत प्रपत्रों का सत्यापन एवं ११०९९ पत्रावलियों, २१४६ वाल्यूम्स, पाण्डुलिपियों के १३१४५ प्रपत्रो,ं ४१५ गजट एवं ६५० व्यक्तिगत प्रपत्रों की सुव्यवस्था सुनिश्चित की गयी। संरक्षित अभिलेखों के सन्दर्भ साधन तैयार करने विषयक उपशीर्षक के अन्तर्गत मुख्यतः उद्योग विभाग, ट्रान्सपोर्ट विभाग, हाऊसिग विभाग, मेडिकल विभाग, आपदा विभाग, कोरोनेशन विभाग तथा कृषि विभाग से सम्बन्धित अभिलखों की सूची/इन्डेक्स तैयार की गयी। इसके अतिरिक्त ३२ अभिलेखीय खोज-कार्य भी सम्पन्न किये गये।
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प्राइवेट आर्काइव्ज.
राजकीय अभिलेखों के संरक्षण के साथ ही व्यक्तिगत अधिकार में संरक्षित महत्वपूर्ण ऐतिहासिक हस्त लिखित ग्रन्थ एंव अभिलेख भी संरक्षण हेतु प्राप्त किये जाते हैं। आलोच्य अवधि में प्राइवेट आर्काइव्ज. के अन्तर्गत ब्रहम दर्शन (वर्ष १९०५) एवं सुश्रुत संहिता भाषा नामक दो दुर्लभ ग्रन्थों की द्दायाप्रतियां इस कार्यालय द्वारा प्राप्त किये गये हैं।
3.
 
शोध कार्य
उ०प्र० राजकीय अभिलेखागार का उद्‌देश्य शोधार्थियों को शोध सम्बन्धी कार्य हेतु सहायता प्रदान करना भी है। इस अनुक्रम में वर्ष २००५-०६ में ४९ शोधार्थियों जिनमें देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों से आये शोधार्थियों के अतिरिक्त टोरेन्टो (कनाडा), टैक्सास, कैम्ब्रिज, इलिनॉस (यू०एस०ए०), वर्जीनिया, न्यूजीलैड आदि विदेशी विश्वविद्यालयों के शोधार्थी भी सम्मिलित हैं, ने अभिलेखीय सामग्री का अध्ययन किया है।
4.
 
अभिलेखों का संरक्षण
उ०प्र० राजकीय अभिलेखागार की स्थापना का एक विशेष उद्‌देश्य स्थाई संरक्षण हेतु स्थानान्तरित किये गये अभिलेखों का वैज्ञानिक संरक्षण है। इसी अनुक्रम में आलोच्य अवधि में १४५२४ शीट्‌स की मरम्मत के पश्चात आवश्यकतानुसार विअम्लीकरण, वाष्पीकरण, पृष्ठीकरण, फुलपेस्टिंग, लैमिनेशन आदि कार्य किया गया एवं २७९ वाल्यूम्स/पुस्तकों/रजिस्टर्स की बाइण्डिंग की गयी।
5.
 
रिप्रोग्रैफी
अभिलेखागार की रिप्रोग्रैफी इकाई द्वारा अत्यन्त महत्वपूर्ण परन्तु जीर्ण-शीर्ण एवं दुर्लभ अभिलेखों की माइक्रोफिल्म भी तैयार की जाती है। जिसका उद्‌देश्य ''कम समय कम स्थान एवं कम लागत'' में अभिलेखीय सूचना को अधिक समय (न्यूनतम १०० वर्ष) तक सुरक्षित रखना एवं अभिलेखीय सूचना का सरलतापूर्वक आदान प्रदान करना है। वर्ष २००५-०६ में १५००४ अभिलेखीय पृष्ठों की २५०० फीट/२५ रोल्स माइक्रोफिल्मिंग की गयी। माइक्रोफिल्म सम्बन्धी सुविधा भारतीय एवं विदेशी शोधार्थियों हेतु अत्यन्त महत्वपूर्ण एवं उपयोगी सिद्घ हुयी है।
6.
 
मौखिक इतिहास योजना
हिस्टोरिकल गैप को भरने व क्षेत्रीय इतिहास सृजित करने में मौखिक इतिहास की विशिष्ट भूमिका को दृष्टिगत रखते हुए उ०प्र० राजकीय अभिलेखागार द्वारा मौखिक इतिहास योजना क्रियान्वित की जा रही है। जिसके अन्तर्गत विशिष्ट व्यक्तियों, स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के संस्मरणों को टेप करके संरक्षित किया जाता है। इस अनुक्रम में स्वतंत्रता संग्राम सेनानी क्रमशः श्री शिव मोहन, जौनपुर, उ०प्र० एवं श्री राम विचार पाण्डेय, बलिया, उ०प्र० के संस्मरणों को टेप करके संरक्षित किया गया है, जो आधुनिक भारतीय इतिहास के लेखन की दृष्टि से अति महत्वपूर्ण है।

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