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संक्षिप्त परिचय
संग्रहालय सांस्कृतिक सम्पदा ऐतिहासिक एवं पुरातात्विक धरोहरों को सुरक्षित एवं संरक्षित रखने का वह केन्द्र है, जहाँ प्राचीन कलाकृतियों को संग्रहीत कर राष्ट्र के अतीत की गौरवशाली संस्कृति का दर्शन शोद्यार्थियों, बुद्धिजीवियों तथा सामान्य जनमानस को कराया जाता है। संग्रहालय का कार्य कलाकृतियों का संग्रह करना, संरक्षित करना, शोध करना तथा उन्हे प्रदर्शित करना है। संग्रहालय वर्तमान में औपचारिक शिक्षा तथा शोध का केन्द्र भी है। जो समय पर प्रर्दशनियों व्याख्यान तथा संगोष्ठी आयोजित कर सामान्य जनमानस को शिक्षा देने का कार्य भी करते है।
31 अगस्त, 2002 के पूर्व उ०प्र० के राजकीय संग्रहालय संस्कृति निदेशालय द्वारा संचालित होते थे। प्रदेश के समस्त संग्रहालयों के विकास, स्वतंत्र नियंत्रण एवं प्रावी पर्यवेक्षण नये संग्रहालयों को स्थापना, उनके भवनों का निर्माण कलाकृतियों के क्रय, उनके प्रदर्शन तथा कला अभिरूचि के विकास व्याख्यान, प्रशिक्षण आदि योजनाओं के उन्नयन हेतु 31 अगस्त 2002 से उ०प्र० संग्रहालय निदेशालयय के रूप में स्वतंत्र निदेशालय की स्थापना की गई। राज्य संग्रहालय बनारसी बाग लखनऊ के परिसर में ही इस निदेशालय को स्थापित किया गया है। निदेशक राज्य संग्रहालय लखनऊ को आपने दायित्वों के अतिरिक्त उ०प्र० के विभागाध्यक्ष का कार्य व उत्रदायित्व सौंपा गया है। वर्तमान में उ०प्र० में कुल तेरह शासकीय संग्रहालय है जो अब उ०प्र० संग्रहालय निदेशालय के अधीन संचलित है, जिनमें नौ पूर्ण स्थापित संग्रहालय क्रमशः– राजय संग्रहालय लखनऊ (1863), राजकीय संग्रहालय मथुरा(1874), राजयकीय संग्रहालय झांसी(1978), रामकथा संग्रहालय अयोध्या फैजाबाद(1988), राजकीय बौद्ध संग्रहालय गोरखपुर(1988), लोक कला संग्रहालय लखनऊ(1989), जनपदीय संग्रहालय सुल्तानपुर(1989), राजकीय बौद्ध संग्रहालय कुशीनगर(1995), राजकीय पुरात्तव संग्रहालय कन्नौज(1996), तथा चार नवस्थापित संग्रहालय– राजकीय स्वतंत्रता संग्राम सेनानी संग्रहालय मेरठ, अम्बेडकर संग्रहालय एवं पुस्तकालय रामपुर, राजकीय संग्रहालय पिपरहवां एवं राजकीय जैन संग्रहालय मथुरा हैं। इनमें से राज्य संग्रहालय लखनऊ एवं राजकीय संग्रहालय मथुरा अपने संग्रह के लिये अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर ख्याति प्राप्त है। राजकीय संग्रहालय मथुरा मथुरा कला विशेष से रूप कुषाण कला के लिए अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर सुविख्यात है जिसमें प्रस्तर कलाकृतियाँ, मृणमूर्तियां, लघुचित्र, सिक्के, हस्तलिखित अभिलेख, धातु एवं काष्ठ मूर्तियों की लगभग चालीस हजार कलाकृतियों संग्रहीत हैं उ०प्र० के शासकीय संग्रहालयों में प्रदर्शन कार्य के अतिरक्ति कलाकृतियों का संरक्षण अभिलेखीकरण एवं शैक्षिक गतिविधियों का संचालन भी किया जाता है।
दिनांक 05 अगस्त, 2004 से उ०प्र० संग्रहालय निदेशालय लखनऊ के अधीन संग्रहालय वेबसाइट के माध्यम से सूचना क्रान्ति के अग्रदूत इन्टरनेट पर उपलब्ध है। अब विश्व के किसी कोने में बैठा हुआ व्यक्ति इन संग्रहालयों में संग्रहीत कलानिधि का परिचय प्राप्त कर सकता है।
नोट - इस विभाग⁄निदेशालय का विस्तृत कार्य विवरण इनके सम्बन्धित साइट पर देखा जा सकता है।
1
साप्ताहिक अवकाश रविवार
2
अन्य अवकाश द्द्वितीय शनिवार तथा अन्य राजपत्रित अवकाश
3
समय 09:30 पूर्वान्ह से 6:00 सांय
4
दूरभाष ⁄ फैक्स 0522–2205142
5
वेबसाइट upmuseums.org
6
ईमेंल drsml@indiatimes.com

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